तस्कर (ट्राफ़िकर) की रीत और तंत्र :
हर वर्ष 5000 और 7,000 के बीच नेपाली लड़कियों भारतीय शहरों में लाल बत्ती जिलों में अवैध व्यापार के लिये लाई जा रही हैं. कई लड़कियों की उम्र मुश्किल से ९ या १० साल हैं. 200.000 या 250,000 से अधिक नेपाली महिलाओं और लड़कियों पहले से ही भारतीय वेश्यालयों में हैं. गरीब माता पिता के द्वारा लड़कियों को बेचा जाता है,जिन्हे विवाह या शहरों में रोजगार का वादा करके धोखे से हिंदुस्तान के वेश्यालयों में लाया जाता हैं, जब तक वे जानें कि कैसे एक दिन में 25 ग्राहकों को सेवा देना हैं, इन्हे कई दिन के लिए बंद करके, भूखा रखके, पीटकर, और सिगरेट से जलाकर अत्याचार किया जाता है, . कुछ लड़कियों को वेश्यावृत्ति शुरु करने से पहले तालिम दी जाती है, जिसमे 'लगातार अश्लील फिल्मों बताना, ग्राहकों को कैसे मनोरंजन करना, बलात्कार दोहराना जैसे ट्यूटोरियल शामिल हैं.(सोमा वाधवा, "बचपन बिक्री के लिए," आउटलुक, 1998)
महिलाओं और लड़कियों की तस्करी भारत और नेपाल के बीच 1740 मील लंबी खुली सीमा के साथ आसान है. नेपाली महिलाओं और लड़कियों की तस्करी, भारत में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नशीले पदार्थों की तस्करी की तुलना में कम जोखिम भरा है. ट्रैफ़िकर कागजी कार्रवाई या पुलिस की जाँच के खतरों की परेशानी के बिना एक समय में लड़कियों के बड़े समूहों नौका द्वारा लाता है.कूतना दलाल पुलिस नेटवर्क प्रक्रिया को सहज बना देता है. (नेपाली) 1,000 रु के लिए खरीदी गई लड़कियों, बाद में लेन - देन में 30,000 रुपये लाने मे ज्ञात कि जाती है. स्थिति की अनदेखी करने के लिये वेश्यालय मालिकों द्वारा पुलिस को भुगतान कीया जाता हैं. लड़कियां वेश्यालयों छोड़ नहीं पाती, जब तक वे अपना कर्ज चुका ना दे. जो समय वे बीमार हो जाती हैं, एचआईवी और / या तपेदिक के भोग बनती है, और अक्सर अपने स्वयं के बच्चों भी होते है.. (सोमा वाधवा, "बिक्री के बचपन के लिए," आउटलुक, 1998)
महिलाओं और लड़कियों की खरीद के लिए, तस्कर द्वारा प्रयोग किया गया क्षेत्रों सिन्धलपुर्, मकवन्पुर, धडिन्ग्, खावरे और नेपाल,के अलग जिलों,है जहां आबादी काफी हद तक अनपढ़ है. (सोमा वाधवा, "बिक्री के लिए बचपन ," आउटलुक, 1998)
Re-narration by Amrapali in Hindi targeting Indian Ground, Barbados for this web page
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